Tuesday, July 26, 2011

wave...

क्या ज़िन्दगी इतनी मुश्किल होती है
कि हसना भी एक बोझ बन जाता है
न कोई उम्मीद बचती है आँखों मे
न बची साँसों का पैमाना....
हर दिन नयी ज़द्दोज़हत भी
पुरानी सी लगती है...

क्या ज़िन्दगी इतनी मुश्किल होती है
कि दिल के धड़कने का एहसास नहीं होता
अपनी परछाई भी डरावनी लगाती है......

क्या ज़िन्दगी इतनी मुश्किल होती है
कि आंसू मेरे दोस्त बन जाते है
और हसी अजनबी...

क्या इतनी मुश्किल
कि ज़िन्दगी से रुसवा होकर
गहरी नींद मे सोना आसान लगने लगता है.......

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